प्रथम विश्व सरंगी दिवस 2025 का आयोजन नई दिल्ली के त्रिवेणी कला संगम, में किया गया । यह आयोजन भारतीय शास्त्रीय संगीत के महान स्तंभ, सरंगी सम्राट उस्ताद साबरी ख़ान साहब की पावन स्मृति को समर्पित है, जिन्होंने सरंगी को न केवल शिखर तक पहुँचाया बल्कि उसे भारत की आत्मा की आवाज़ बनाया।

उस्ताद साबरी ख़ान साहब का स्वतंत्र भारत के इतिहास में एक विशिष्ट और गौरवपूर्ण स्थान है। 15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि, जब भारत ने स्वतंत्रता प्राप्त की, उस ऐतिहासिक क्षण पर उन्होंने सरंगी पर “वंदे मातरम्” की प्रस्तुति दी। यह प्रस्तुति भारत के जन्म का एक अमर सांगीतिक प्रणाम थी, जिसने सरंगी के माध्यम से राष्ट्र की आत्मा को स्वर प्रदान किया। यह क्षण न केवल कलात्मक बल्कि ऐतिहासिक दृष्टि से भी अद्वितीय था।

विश्व सरंगी दिवस 2025 का आयोजन उनकी अतुलनीय विरासत को सम्मान देने तथा सरंगी को एक वैश्विक सांस्कृतिक वाद्य के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। इस ऐतिहासिक पहल का नेतृत्व कर रहे हैं उस्ताद कमाल साबरी, अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त सरंगी वादक, सौरंग संगीत सोसायटी के अध्यक्ष एवं उस्ताद साबरी ख़ान साहब के सुपुत्र। 400 वर्ष पुरानी मुरादाबाद घराने की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए, उस्ताद कमाल साबरी ने अपना जीवन सरंगी के संरक्षण, नवाचार और वैश्विक प्रसार के लिए समर्पित किया है।
यह आयोजन श्री विमल श्रीवास्तव, प्रबंध निदेशक, इग्नाइट मीडिया एंड एंटरटेनमेंट लिमिटेड के सह-आयोजन में संपन्न हो रहा है, जिनकी दूरदर्शिता और नेतृत्व भारत की सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक मंच पर स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।