स्वामिनारायण अक्षरधाम, नई दिल्ली स्थित बीएपीएस स्वामिनारायण शोध संस्थान (BAPS Swaminarayan Research Institute) द्वारा रविवार को “हिंदू ग्रंथों में प्रार्थनाएँ: दार्शनिक, साहित्यिक और भक्ति आयाम” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का सफल आयोजन किया गया। इस प्रतिष्ठित शैक्षणिक आयोजन में देश भर के विश्वविद्यालयों और संस्थानों से जुड़े विद्वानों, शोधकर्ताओं और छात्रों ने भाग लिया, जिन्होंने सनातन धर्मग्रंथों में प्रार्थना के गूढ़ अर्थों पर अपने मौलिक दृष्टिकोण और गहन शोध प्रस्तुत किए।

उद्घाटन एवं मुख्य उद्बोधन
सम्मेलन का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्राकट्य, प्रार्थना और वैदिक मंत्रोंच्चार के साथ किया गया। इसके बाद पूज्य डॉ ज्ञानानंददास स्वामी(सहायक निदेशक, बीएपीएस स्वामिनारायण शोध संस्थान) ने स्वागत प्रवचन द्वारा विशिष्ट अतिथियों और सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए सम्मेलन के मुख्य विषय की दार्शनिक आवश्यकता और महत्व को स्पष्ट किया। इस अवसर पर प्रतिष्ठित शिक्षाविदों में प्रो. मुरली मनोहर पाठक (कुलपति, श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय), प्रो. शिव शंकर मिश्रा (कुलपति, महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय, उज्जैन), प्रो. डी. बालगणपति (प्रोफेसर, दर्शन विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय), प्रो. उपेंद्र राव (प्रोफेसर, संस्कृत एवं भारतीय अध्ययन केंद्र, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय), प्रो.ओमनाथ बिमली (मुख्य अध्यक्ष, संस्कृत विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय), प्रो. गिरिशचन्द्र पन्त, विभागाध्यक्ष, संस्कृत, जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय, दिल्ली), शामिल रहे, जिन्होंने हिंदू परंपरा में प्रार्थना के महत्व पर अपने विचार साझा किए।बीएपीएस स्वामिनारायण शोध संस्थान के अध्यक्ष, महामहोपाध्याय पूज्य भद्रेशदास स्वामी ने अपने वीडियो संदेश के माध्यम से सम्मेलन के उद्देश्य को विस्तार से समझाया। उन्होंने प्रार्थना को आध्यात्मिक उन्नति, चरित्र निर्माण और मुक्ति प्राप्ति के साधन के रूप में एक आवश्यक और शक्तिशाली माध्यम बताया।
मौलिक शोध प्रस्तुतियाँ
सम्मेलन के द्वितीय सत्र का संचालन डॉ सुनील जोशी, (प्राध्यापक, हिन्दू कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय) ने किया। सम्मेलन के दूसरे और मुख्य सत्र में विद्वानों ने विभिन्न प्राचीन और मध्यकालीन हिंदू ग्रंथों पर आधारित अपने मौलिक शोध पत्र प्रस्तुत किए। इन शोध पत्रों में प्रार्थना के विभिन्न आयामों को समाहित किया गया था, जिनमें वेदों में स्तुति, भक्ति साहित्य में शरणागति और अनन्य प्रेमभाव, और प्रार्थना के मनोवैज्ञानिक प्रभाव शामिल थे।प्रमुख प्रस्तुति देने वाले विद्वानों में डॉ. नरेंद्रकुमार पंड्या (प्राचार्य, श्री सोमनाथ संस्कृत विश्वविद्यालय), श्रीमती शालिनी सारस्वत (संस्कृत अध्यापिका, मदर्स इंटरनेशनल स्कूल), डॉ माध्वी आदि शामिल थे। इन प्रस्तुतियों ने विषय वस्तु पर सार्थक और गहन चर्चाओं का मार्ग प्रशस्त किया।
समापन एवं आभार
सम्मेलन के समापन पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भेंट किए गए। अंत में, श्रीमती हिमानी मेहता ने इस आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी विद्वानों, प्रतिभागियों और संस्थान से जुड़े सदस्यों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया।बीएपीएस स्वामिनारायण अनुसंधान संस्थान के विषय में:बीएपीएस स्वामिनारायण शोध संस्थान, स्वामिनारायण अक्षरधाम, नई दिल्ली में स्थित एक प्रतिष्ठित शैक्षणिक केंद्र है। यह भारतीय संस्कृति, दर्शन, धर्मशास्त्र और भाषाओं पर शोध एवं अध्ययन को समर्पित है, जिसका उद्देश्य प्राचीन ज्ञान को आधुनिक संदर्भों में प्रस्तुत करना और अकादमिक जगत को समृद्ध करना है।